॥ ॐ ॥

भेदावत देवड़ा इतिहास

सिरोही के डुंगरावत देवड़ो के उप शाखा अनुसार ठिकानों की सूची

*जय माताजी हुकम।*
सिरोही के महाराव शिव भान उर्फ शोभा के अनुज गजेसिंह के पुत्र डूंगरसिंह को विक्रम संवत 1446 (1388 ईस्वी) में 24 गांवों सहित राड़बर की जागीर मिली। इन्ही डूंगरसिंह के वंशज डुंगरावत देवड़ा कहलाते है। डुंगरावतो का मूल स्थान राड़बर है जहां से इनकी विभिन्न उपशाखाओं के निकलने का क्रम शुरू हुआ।

वंश वृक्ष (Genealogy Tree)

विशेष नोट

डूंगरसिंह के ज्येष्ठ पुत्र आल्हण के पुत्र तेजसिंह को विक्रम सम्वत 1515 (1458 ईस्वी) में ओडा की जागीर मिली। तेजसिंह के बाद नरसिंह ओडा का पाटवी बना।

विशेष नोट

ओडा के तेजसिंह के बाद उनका जयेष्ठ पुत्र नरसिंह ओडा में ही रहा। नरसिंह के जयेष्ठ पुत्र सवरसिंह से सवरावत, दूसरे पुत्र सुरसिंह से सुरावत, तीसरे पुत्र भीमसिंह से भिमावत, चौथे पुत्र अर्जुनसिंह से अर्जुणोंत नामक उप शाखाएं निकली।

विशेष नोट

सुरावतो के मूल पुरुष सुरसिंह के पुत्र कलसिंह के दो पुत्रों क्रमशः मेरसिंह से मेरावत एवमं अमरसिंह से अमरावत नामक उप शाखाए निकली।